क्या खूब है ये पंक्तियाँ ‘गर फिरदौस बर रुए ज़मीं अस्त; हमीं अस्तो, हमीं अस्तो, हमीं अस्त’ पर्वतों की गोद में ये हसीन घाटियाँ , बर्फ का मुकुट और गगनचुम्बी डालियाँ । फूलों की बहार ख्वाबों का मंजर, जन्नत की छांव और ये कश्मीर शहर । चश्मे शाही की जलधार , जैसे मन में बजाए सितार । झील के किनारे नावों की हलचल, जिसे देख मन जाए मचल-मचल । हर मोड़ पर बसी एक कहानी पुरानी, कश्मीर की सुंदरता में है मनमानी । बर्फ से ढकी मखमल सी घाटियाँ, बर्फीली चाँदनी ओढ़े ये वादियाँ । इस शहर की है एक अलौकिक छवि, बस जाए जैसे जीवन की गति । आंखों में चमक और मन में मुस्कान, पत्थरों से सजे यहाँ पुराने भवन महान । कश्मीर की रंगीनी और कहवे की प्याली, हर फूल खिले यहां और मौसम है निराली । नीले आसमान में चाँद और तारे मुस्काते, धरती का स्वर्ग यहां हर गुल खिलखिलाते । कल-कल बहती नदी जैसे स्वप्नों का सिलसिला , यहाँ सूरज की किरणें बिखेरे अपना ही जलजला हर दिल सजाए चाहत की साज, यहां की खूबसूरती में है एक राज । यह धरती का स्वर्ग प्रेम का संदेश , यहां पर जीवन है बहुत ही विशेष । -श्रीमती श्वेता सिंह