कविता-धरती का स्वर्ग कश्मीर

 क्या खूब है ये पंक्तियाँ

‘गर फिरदौस बर रुए ज़मीं अस्त; हमीं अस्तो, हमीं अस्तो, हमीं अस्त’


पर्वतों की गोद में ये हसीन घाटियाँ ,

बर्फ का मुकुट और गगनचुम्बी डालियाँ ।

फूलों की बहार ख्वाबों का मंजर, 

 जन्नत की छांव और ये कश्मीर शहर ।


चश्मे शाही की जलधार ,

जैसे मन में बजाए सितार ।

झील के किनारे नावों की हलचल,

जिसे देख मन जाए मचल-मचल ।


हर मोड़ पर बसी एक कहानी पुरानी,

कश्मीर की सुंदरता में है मनमानी ।

बर्फ से ढकी मखमल सी घाटियाँ,

बर्फीली चाँदनी ओढ़े ये वादियाँ ।


इस शहर की है एक अलौकिक छवि,

बस जाए जैसे जीवन की गति ।

आंखों में चमक और मन में मुस्कान,

पत्थरों से सजे यहाँ पुराने भवन महान ।


कश्मीर की रंगीनी और  कहवे की प्याली,

हर फूल खिले यहां और मौसम है निराली ।

नीले आसमान में चाँद और तारे मुस्काते,

धरती का स्वर्ग यहां हर गुल खिलखिलाते ।


कल-कल बहती नदी जैसे स्वप्नों का सिलसिला , 

यहाँ सूरज की किरणें बिखेरे अपना ही जलजला 

हर दिल सजाए चाहत की साज,

यहां की खूबसूरती में है एक राज ।


यह धरती का स्वर्ग प्रेम का संदेश ,

यहां पर जीवन है बहुत ही विशेष ।

-श्रीमती श्वेता सिंह

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