क्या है क्रोशिया? क्रिएटिविटी, सेल्फ-एक्सप्रेशन या स्किल डेवलपमेंट ?
क्रोशिया एक हुकदार लगभग छह इंच लंबी सलाई को कहा जाता है जिससे ‘लेस’ या ‘जाली’ बुनी जाती है। इससे बुने काम को क्रोशिए का काम कहते हैं। कुछ सालों पहले घर-घर में क्रोशिया से बुने हुए तकिये के कवर, चादर, रुमाल, शो पीस और अन्य सामान आसानी से देखे जाते थे। बदलते वक्त और भागदौड़ भरी जिंदगी में घरों और बाजारों से क्रोशिया की बुनी हुई चीजें गायब होती चली गई। लेकिन इन दिनों एक बार फिर क्रोशिया से बने समान के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ा है। आज-कल क्रोशिया से बच्चों के कपड़े, तकियों के कवर , पर्स, सजावट का समान, मेजपोश से लेकर खूबसूरत और ट्रेंडी ज्वेलरी भी बनाई जा रहीं हैं। बदलते समय के साथ महिलाओं ने अपने इस शौक और हुनर को अपना बिज़नेस बना लिया है। - श्रीमती श्वेता सिंह क्रोशिया सीखने व बुनने की कोई उम्र सीमा नहीं है। 40-45 की उम्र पार करते ही लोगों को लगने लगता है कि अब उनके आराम करने का समय आ चुका है। बहुत से लोग समझने लगते हैं कि अब वह कुछ नहीं कर सकते तथा अपने छोटे से छोटे काम के लिए भी, दूसरों पर निर्भर रहने लगते हैं। लेकिन, आज हमारे समाज में कई ऐसे उदाहरण है जिन्होंने 50 की उम्र के बाद...