इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार है च्यवनप्राश, जानिए कैसे बनाया जाता है और किन चीजों का होता है इस्तेमाल | च्वयनप्राश बनाने की विधि

 

 अपने शरीर को मजबूत बनाने लिए लोग कई उपाय करते है। च्यवनप्राश को अपनी ख़ुराक़ में शामिल कर के हम अपने स्वास्थ्य का अच्छा खासा धयान रख सकते है। च्यवनप्राश में कई आयुर्वेदिक औषिधियाँ होती है जो हमारे शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाती है और यही वजह है कि आजकल डॉक्टर भी लोगों को च्वनप्राश खाने की सलाह दे रहे हैं। 

च्यवनप्राश के कई सारे फायदे होते हैं :

1. यह सांस की नली को साफ रखता है।अगर आपको सांस की दिक्कत है तो आप जरुर इसका सेवन करें। 

2. यह पाचन क्रिया में सुधार करता है और च्यवनप्राश का प्रमुख घटक आंवला कब्ज को कम करता है। साथ ही ये आपके वजन को भी कम करता है. 

3. यह शरीर में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाता है।

4. यह रक्त को शुद्ध करता है।

5. यह रक्तचाप को सामान्य करता है।

6. यह कोलेस्ट्रॉल के लिए अच्छा है।

7. यह सक्रियता और एकाग्रता को बेहतर बनाने में मदद करता है।

 8. इसमें विटामिन सी की अच्छी मात्रा पाई जाती है। इसलिए यह संक्रमण के खिलाफ शरीर की रक्षा करने में मदद करता है।

9. च्यवनप्राश का सेवन करने से आपका इम्यून सिस्टम बहुत अच्छा होता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं। च्यवनप्राश का सेवन करने से शरीर किसी भी तरह के संक्रमण का सामना बेहतर तरीके से कर सकता है। 

आइए जानते हैं कि च्यवनप्राश बनाने में किन-किन औषधियों का इस्तेमाल किया जाता है :

यहां श्रीमती संतोष बलहारा द्वारा च्यवनप्राश बनाने की रेसिपी दी जा रही है।  

च्यवनप्राश बनाने में जिन औषधियों का इस्तेमाल किया जाता है उन्हें हम चार भागों में विभाजित कर सकते है -

१. मुख्य घटक: आंवला च्यवनप्राश बनाने के लिए सबसे जरूरी होता है। जो रेसिपी हम आपको बता रहे हैं उसके लिए आपको 5 किलो आंवला की जरुरत है। आंवला आपकी सेहत के लिए कितना फायदेमंद है।  इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी होता है, जो शरीर की रक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। इसे पकाने के बाद भी विटामिन सी की मात्रा में कोई कमी नहीं आती है।

२. चिकनाई : हर देशी दवाई में चिकनाई अवश्य मिलाई  जाती है जो दवाई के गुणों  को बड़ा देती है  और इसके पाचन में भी मदद करती है। च्यवनप्राश बनाने के लिए हम  शुद्ध देसी घी और  तिल के तेल का प्रयोग करते है । आप इन दोनों को 250 ग्राम की बराबर मात्रा में ले लें।  

३. अर्क : च्यवनप्राश बनाने  में जिन जड़ीबूटियों का अर्क डालता है वे इस प्रकार है :

 शतावरी -50 ग्राम 

 ब्राह्मी - 50 ग्राम  

काकनासा - 50 ग्राम 

छोटी हर्र (हरीतकी) -25 ग्राम 

बिदरीकन्द -  50 ग्राम 

 वसाका -50 

 जटामासी - 50 ग्राम  

बेल -50 ग्राम 

 कचूर -50 ग्राम  

 नागरमोथा -50 ग्राम 

 काकडसिंघी -  25 ग्राम 

दशमूल -१५० ग्राम 

  मुग्ध प्रणी -25 ग्राम 

 जीवन्ती -25 ग्राम 

 पुनर्नवा -25 ग्राम  

 गिलोय -50 ग्राम 

 तुलसी के पत्ते -50 ग्राम 

मुलेठी -50 ग्राम 

भूमि आंवला - 25 ग्राम 

 ये सब आपकी सेहत के लिए कितने फायदेमंद है। इन्हें खाने से कई तरह की बीमारियों से छुटकारा मिलता है। 

 ४. चूर्ण /मसाला : जिन जड़ी-बूटियों को पीस कर उनका चूरन च्यवनप्राश में मिलाया जाता है वे इस प्रकार है :

 पिप्पली- 50 ग्राम,

अभ्रक भस्म -10 ग्राम 

अकरकरा - 50 ग्राम  

 बंशलोचन- 50 ग्राम

 दालचीनी- 50 ग्राम

लौंग - 50 ग्राम 

 तेजपत्र- 25  ग्राम,

 नागकेशर- 25  ग्राम,

 छोटी इलायची- 25  ग्राम,

 केसर- 1  ग्राम, 

अश्वगंधा -50 ग्राम 

५. मीठा : च्यवनप्राश में  मिठास के लिए गुड़ या चीनी का इस्तेमाल किया जाता है। 5 किलो आंवले के साथ 3 किलो चीनी जाती है। मधुमेह के मरीज़ इसमें चीनी की जगह शुगरफ्री भी डाल सकते है। 

५. अन्य सामग्री :

शहद - 250 ग्राम

मुनक्का - 50 ग्राम 

चांदी का वर्क - 5 

 च्वयनप्राश बनाने की विधि :


१.  एक बड़ा स्टील का बर्तन लें उसमें पानी डालें और फिर उसमें अर्क वाली सारी चीज़ें डाल दें। 

२. इस बर्तन को आप गैस पर रख दें जब पानी अच्छे से उबलने लगें तो तो आप गैस को धीमी आंच पर रख दें और इसे आप 1-2 घंटे के लिए उबलने दें।  अब आप इसे गैस से उतार कर 10-12 घंटे के लिए ढक कर रख दें।सारी जड़ी बूटियों का फायदा इसी पानी में आ जाएगा। 

३. पानी में जो जड़ी बूटियां हैं उन्हें आप छलनी से छान लें। आप छानने के लिए छलनी की जगह कपड़े का इस्तेमाल भी कर सकती हैं। 

४.  एक बडे से स्टील के बर्तन में इस पानी को डालें और आंवले मिलाये। 

५. आंवले को इस पानी में उबालते रहे ताकि आंवला नरम हो जाए । आंवले में सारी जड़ी बूटियों का असर आ जाएगा इसका रंग भी बदल जाएगा। 

६. आंवले को निकाल कर उसके बीजों को अलग कर दें और आंवले का पेस्ट बना लें। बचे पानी को भी छान कर रख लें। 

७. अब इस पल्प को आप लोहे की कढ़ाही में भून लें इसे जितना पकाएंगें ये उतना गाढ़ा हो जाएगा। 

८. अब आप कढ़ाही में तिल का तेल डाल कर गरम करें और इस गरम तेल में घी डालें। जब तिल का तेल और घी अच्छी तरह गरम हो जाय तब आंवले का गाढ़ा पल्प डालिये और चमचे से हिलाती रहें। मुनक्का के छोटे छोटे टुकड़े भी मिला लीजिए  

९. जब इस मिश्रण में उबाल आने लगे तब आप इसमें चीनी मिला दें। लगातार चम्मच से हिलाते हुए आप मिश्रण को चलाती रहें।  ये जैसे-जैसे पकेगा और गाढा होता जाएगा ध्यान रखें कि आप इसे पतला करने के लिए जड़ी बूटी वाला पानी इस्तेमाल कर सकती हैं। 

१०. जब मिश्रण अच्छी तरह से गाढ़ा हो जाए तो गैस बंद कर दें और इसे लोहे की कढ़ाही में ही 5-6 घंटे के लिए ढक कर पड़ा रहने दें। 5-6 घंटे बाद आप चाहें तो इसे स्टील के बर्तन में भी निकाल सकती हैं। 

११. अब बारी आती है चूरन /मसाला मिलाने की। सभी जड़ीबूटियों को मिक्सी में एकदम बारीक पीस लें। अब इस पिसी सामग्री को शहद और केसर में मिलाकर आंवले के मिश्रण में अच्छी तरह से मिला दे। 

आयुर्वेदिक च्यवनप्राश तैयार है !!


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