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Mango pickle recipe | आम का अचार रेसिपी | घर पर अचार बनाते वक्त इन बातों का रखें ख्याल

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भारतीय खाने को पसंद किया जाता है उसके खास जायके की वजह से । हमारा भारतीय खाना काफी मसालेदार और चटपटा होता है और इसके साथ परोसे जाने वाले अचार और चटनी इसे और भी स्पेशल बना देती हैं ।  आम सिर्फ गर्मी में ही होता है । इसी वजह से गर्मी के मौसम में बाजार कच्चे आमों से भरे होते है । लोग अपने घरों में आम का अचार बनाकर साल भर तक उसके स्वाद का मजा लेते हैं ।  इस अचार को खास बनाता है उसमें डाले जाने वाला  अचारी मसाला CLICK HERE  । घर पर कैसे बनाएं आम का अचार सामग्री: कच्चा आम ( टुकड़ों में कटा हुआ) - 5 किलो  मैथी - 250 ग्राम   सौंफ - 250 ग्राम  नमक - 250 ग्राम  हल्दी - 125 ग्राम  लाल मिर्च - 125 ग्राम  कलौंजी - 60 ग्राम  सरसों का तेल - लगभग 1.5 लीटर  आम का अचार बनाने की विधि: (1) कच्चे और अच्छे गूदे वाले आम बाजार से ले आइये और इन को साफ पानी से धो कर टुकड़े कर लीजिए । (2) फाकों में अच्छे से नमक लगाकर रात भर के लिए रख दें । ऐसा करने से आम की फाकों का अतिरिक्त पानी निकल जाएगा । (3 ) अगले दिन छान कर फाकों में से पानी अलग कर दें औ...

Achari Masala Recipe | अचारी मसाला पाउडर रेसिपी

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भारतीय खाने का जायका बढ़ाने में अचार बहुत काम आता है। अगर आपको आम और लाल मिर्च का अचार पसंद है तो , आज हम आपको बताएंगे कि घर पर अचार का मसाला कैसे तैयार किया जाता है । आप इसे न केवल अचार बनाने में बल्कि किसी भी सब्जी में अचारी फ्लेवर देने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं ।  इस अचारी मसाले का इस्तेमाल आप अचारी आलू , अचारी पनीर , अचारी परांठा , अचारी पेठा , अचारी गोभी , अचारी पनीर टिक्का , अचारी बैंगन और अचारी भिन्डी बनाने के लिए भी कर सकते है। 5 किलो आम के अचार के लिए मसाला बनाने की सामग्री / Ingredients :  मैथी - 250 ग्राम   सौंफ - 250 ग्राम  नमक - 250 ग्राम  हल्दी - 125 ग्राम  लाल मिर्च - 125 ग्राम  कलौंजी - 60 ग्राम  अचारी मसाला बनाने की विधि: (1)  सभी मसालों को एक बड़े थाल में रखकर धूप में सुखा लें । ऐसा करने से मसाले जल्दी रोस्ट हो जाएंगे । ( 2 ) गैस पर कड़ाही रखें और धीमी आंच पर सौंफ और मैथी को 1 से 2 मिनट तक भून लें । ध्यान रहे ये जलें नहीं वरना कड़वे हो जाएंगे । (3)  आंच बंद कर दें और गरम कड़ाई में कलौंजी डाल दे ।  (4) स...

झटपट और आसान चना दाल लड्डू रेसिपी

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त्योहारों पर मेहमानों को अपने हाथों से बनी मिठाई खिलाने का एक अलग ही मजा है। इसलिए आज हम चने की दाल के ऐसे लड्डू बनाने जा रहे हैं जिन्हे एक बार बनाकर खाएंगे तो , बाजार के मोतीचूर के लड्डू भूल जाएंगे ।  तो आप भी इस आसान रेसिपी से चना दाल के लड्डू बनाएं और अपने परिवार के साथ इसका आनंद लें । चना दाल लड्डू के लिए जरूरी सामग्री :  चना दाल - 1 कटोरी घी - 1 कप (तलने के लिए ) हरी इलाइची - 5-6, दरदरी कुटी हुई चीनी - 1 कटोरी खरबूजे के बीज - स्वादानुसार बादाम की कतरन - स्वादानुसार खाने वाला रंग - एक चुटकी चना दाल लड्डू बनाने की विधि : 1 . चना दाल को अच्छी तरह धोकर 4 घंटे के लिए भिगो दें।  2.  उसके बाद सारा पानी निकालकर मिक्सर जार में डालकर दरदरा पीस लें और  इसे एक बाउल में निकाल लें। 3. अब पैन में 1 कप घी डालकर गर्म करें । घी मध्यम-तेज गर्म होना चाहिए । गरम घी में दाल के  पकौड़े पलट - पलट कर गोल्डन ब्राउन होने तक तल लीजिए । 4. तलने के बाद इन्हें एक प्लेट में तोड़कर ठंडा होने के लिए रख दें।  5. ठंडा होने के बाद इन्हें मिक्सी में डालकर दरदरा पीस लें। इस तरह चूरमा ब...

गणेश चतुर्थी | गणेश चतुर्थी व्रत क्यों मनाया जाता है? | 10 दिनों तक क्यों मनाई जाती है गणेश चतुर्थी? | गणेश चतुर्थी की कहानी क्या है?

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  गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह त्योहार भारत के विभिन्न भागों में ,खासतौर  से महाराष्ट्र में बडी़ धूमधाम से मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी पर  भगवान गणेशजी की पूजा की जाती है।  गणेश चतुर्थी का त्योहार भगवान गणेश के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इस दिन मंदिरों, पंडालों से लेकर घर-घर में भगवान  गणेश   की मूर्ति स्थापित की जाती है। साथ ही पूरे 10 दिनों तक उनकी पूजा अर्चना की जाती है।  गणेश चतुर्थी की कथा : पहली कथा : एक पौराणिक कथा के अनुसार  माता पार्वती ने स्नान करने से पूर्व अपनी मैल और उबटन  से एक बालक को उत्पन्न करके उसे अपना द्वार पाल बनाया। जब शिवजी ने प्रवेश करना चाहा , तब उस बालक ने उन्हें रोक दिया। इस पर भगवान शंकर ने क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से उस बालक का सिर काट दिया। इससे  माता पार्वती क्रुद्ध हो उठीं और उन्होंने प्रलय करने की ठान ली। उन्हें शांत  करने के लिए , शिवजी के आदेश  पर विष्णु जी उत्तर दिशा में सबसे पहले...

Navchetna Hindi Magazine Holi special March 2023

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   Cover page March 2023

नवचेतना हिंदी मैगजीन फरवरी 2023

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    Cover page February 2023 संपादक की कलम से :  मैं, श्रीमती चेतना मालिक ,नवचेतना टीम की ओर से सभी पाठकों का अभिनन्दन करती हूँ। नवचेतना एक डिजिटल हिंदी मैगज़ीन है जिसका उद्देशय इक्कीसवीं सदी की आधुनिक नारी को और अधिक सजग , सुयोग्य व स्वालंभी बनाना है। यह हर गृहणी व कामकाजी महिला के मन का आईना है। इस मैगज़ीन में विभिन्न विषयों जैसे कुकिंग , हेल्थ , लाइफस्टाइल , होम मेकिंग , फैशन , रोजगार आदि पर सरल भाषा में जानकारी देने की कोशिश की गयी है। इसके साथ साथ कहानियों ,कविताओं व गेम्स के द्वारा पाठकों के मनोरंजन का ख्याल भी रखा गया है। इस महीने की पेरेंटिंग स्पेशल में पाठकों को कुछ ऐसे टिप्स दिए गए हैं , जिनकी मदद से आप बच्चे को हर दिन कुछ ना कुछ अलग और टेस्टी खाना टिफिन में दे पाएंगी । बच्चे भी उन्हें शौक से खाएंगे और आपकी तारीफ भी करेंगे।  इस अंक में हम जानेंगे कि 2 साल से 5 वर्ष की उम्र के बीच बच्चों को अच्छे स्पर्श और बुरे स्पर्श के बारे में शिक्षित ज़रूर करना चाहिए। इस साल रंगों का पर्व होली भी बोर्ड की परीक्षाओं के दौरान पड़ रहा है। जाहिर है ऐसे में स्टूडेंट्स खुद को हो...

ये बेरहम धुआं | hindi poem on side effects of smoking

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  जिंदगी की जद्दोजहद में , फिर कोई उलझा सा है । केकड़े के पंजों में फिर एक , हौसला जकड़ा सा है । एक सिगरेट से निकलता हुआ धुआं, फिर पूरे परिवार को राख कर गया । ये बेरहम नशा एक बार फिर , अपनों की ही जिंदगी ख़ाक कर गया । एहसास ही नहीं था कि यह रोग नहीं महामारी है । आज पाया कि मौत अब  जिंदगी पर भारी है। सोचता है कि कैसे अतीत में जा कर, नशे से नाता तोड़ दूं । आज मैं अपने बच्चों के सभी , टूटे सपनों को वापस जोड़ दूं । धुएं के कश में क्यों मैंने, बच्चों का भविष्य उड़ाया । क्यों नहीं वह पल मैंने , अपने अपनों के साथ बिताया । पेट में है भूख , है हाथ में रोटी, पर आज मुंह नहीं है चबाने के लिए । दिन रात सोचता रहता है तरीके, मौत को दूर भगाने के लिए । परिवार के साथ से जिंदगी की उम्मीद तो बढ़ रही है, एक बस एक और कोशिश  कहते-कहते छोटी सी चींटी पहाड़ चढ़ रही है । पर ऐसी बेरहम है ये बीमारी मेरे दोस्तों , कि आज मौत जिंदगी पर भारी पड़ रही है।  जिंदगी दिन पर दिन, और बेरहम होती जाएगी । मौत ही इस दर्द से अब , इसको मुक्ति दिलाएगी । कमजोर हो गया है , आजकल कम खाता- पीता है  ।  पर मौत ...