गणेश चतुर्थी | गणेश चतुर्थी व्रत क्यों मनाया जाता है? | 10 दिनों तक क्यों मनाई जाती है गणेश चतुर्थी? | गणेश चतुर्थी की कहानी क्या है?

 

गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह त्योहार भारत के विभिन्न भागों में ,खासतौर  से महाराष्ट्र में बडी़ धूमधाम से मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी पर  भगवान गणेशजी की पूजा की जाती है।  गणेश चतुर्थी का त्योहार भगवान गणेश के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इस दिन मंदिरों, पंडालों से लेकर घर-घर में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित की जाती है। साथ ही पूरे 10 दिनों तक उनकी पूजा अर्चना की जाती है। 

गणेश चतुर्थी की कथा :

पहली कथा :

एक पौराणिक कथा के अनुसार  माता पार्वती ने स्नान करने से पूर्व अपनी मैल और उबटन  से एक बालक को उत्पन्न करके उसे अपना द्वार पाल बनाया। जब शिवजी ने प्रवेश करना चाहा , तब उस बालक ने उन्हें रोक दिया। इस पर भगवान शंकर ने क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से उस बालक का सिर काट दिया। इससे  माता पार्वती क्रुद्ध हो उठीं और उन्होंने प्रलय करने की ठान ली। उन्हें शांत  करने के लिए , शिवजी के आदेश  पर विष्णु जी उत्तर दिशा में सबसे पहले मिले जीव (हाथी) का सिर काटकर ले आए। मृत्युंजय शिवजी ने हाथी  के उस मस्तक को बालक के धड पर रखकर उसे पुनर्जीवित कर दिया। माता पार्वती ने  उस गज मुख बालक को अपने हृदय से लगा लिया और देवताओं में अग्रणी होने का आशीर्वाद दिया। ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने उस बालक को  अग्रपूज्य होने का वरदान दिया। भगवान शंकर ने आशीर्वाद दिया कि बालक तू भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को चंद्रमा के उदित होने पर उत्पन्न हुआ है। इसलिए विघ्न नाश करने में तेरा नाम सर्वोपरि होगा इस तिथि में व्रत करने वाले के सभी विघ्नों का नाश हो जाएगा और उसे सब सिद्धियां प्राप्त होंगी।

इसीलिए हिंदू धर्म में गणेश जी को सभी संकटों को दूर करने वाला और विघ्नहर्ता माना जाता है। चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश की पूजा करना बहुत ही शुभ माना जाता है। चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा करने से ज्ञान और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

दूसरी कथा :

एक अन्य पौराणिक कथा के मुताबिक महर्षि वेदव्यास जी ने भगवान गणेश जी से महाभारत की रचना को लिपिबद्ध करने की प्रार्थना की थी। गणेश चतुर्थी के दिन  व्यास जी ने श्लोक बोलना और गणेश जी ने उसे लिपिबद्ध करना शुरू किया था।  बिना रूके 10 दिन तक लगातार लेखन का कार्य चलता रहा। 10 दिनों में गणेश जी पर धूल-मिट्टी की परत चढ़ गई। इसलिए गणेश जी ने इस परत को साफ करने के लिए 10वें दिन सरस्वती नदी में स्नान किया और तभी से नौ दिन बाद गानों और बाजों के साथ 10वें दिन गणेश प्रतिमा को किसी तालाब इत्यादि जल में विसर्जित किया जाता है।

भगवान गणेश की  पूजा अर्चना :

भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित कर पूरे 10 दिनों तक उनकी पूजा अर्चना की जाती है। हर रोज अलग अलग पकवानो के भोग लगाए जाते हैं इसमें मोतीचूर के लड्डू , आटे के लड्डू, नारियल के लड्डू, रवा के लड्डू आदि शामिल है। आप गुड़ चूरमा के लड्डू भी बना सकते हैं। 

गुड चूरमा लडडू बनाने की विधि 

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