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खतरे की घंटी है फास्ट फैशन | सस्टेनेबल फैशन ही है एकलौता विकल्प | कपडे रीसायकल कीजिये

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  फास्ट फैशन : सरल भाषा में कहें तो फास्ट फैशन एक ऐसा नया ट्रेंड है जो लेटेस्ट डिजाइन को लोगों तक जल्दी और कम दामों में पहुंचाता है। यह स्टाइलिश दिखने का एक सस्ता विकल्प है। जो लोग  महंगे कपड़े नहीं खरीद सकते ,पर ट्रेंड में रहना चाहते है , ये उनके लिए वरदान है। कपड़े की क्वॉलिटी कम रहने के कारण  उसके दाम भी कम होते हैं। नया सीजन आते ही बाज़ार  नई सेल और नई  कलेक्शन  से भर जाता है। सेल के लालच में हम बिना जरूरत के खरीददारी शुरू कर देते है। लोग अब शादी-ब्याह या त्यौहार पर ही नहीं बल्कि हर मौसम में, हर मौके पर नए कपड़े खरीदना पसंद करते हैं।  लोगों का ज्यादा ध्यान सस्ते दामों में बिकने वाले कपड़ों पर  है  जिसे वे थोड़े समय इस्तेमाल कर फ़ेंक  सकते  है। इससे काफी कपड़ा बर्बाद होता है । हर 10  में से 6  कपड़े एक साल के अंदर कूड़े के ढेर में चले जाते हैं। फास्ट फैशन फॉलो करने के चक्कर में हमने जो कपड़ों के कूड़े का ढेर तैयार किया है वो कभी खत्म ना होने की श्रृख्ंला में शामिल हो चुका है। रोजाना बदलन...

हिंदी कविता महंगाई डायन खाय जात है | काव्य के रंग डा. विकास बुधवार के संग | hindi poem on inflation

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एक तरफ बढ़ती हुई महंगाई और बेकारी ,दूसरी तरफ आम इंसान की हर रोज की जरूरतें । इन दोनों के बीच में पिसते हुए आम इंसान की हालत का अंदाजा क्या वे लोग कभी लगा पाएंगे, जो सालों से यह दावा करते आ रहे हैं के वे महंगाई को घटा देंगे? क्या इंसान हर दौर में इसी तरह महंगाई से लड़ता और जूझता रहेगा ? यहां डा. विकास बुधवार द्वारा लिखी कविता प्रस्तुत की जा रही है।  महंगाई डायन खाय जात है  अखबारों ने कीमतों की नई फेहरिस्त लगाई है, गृहस्ती महंगाई का फिर से रोना रोकर आई है।  आंखें नम ,जेबे खाली, तबीयत कुछ घबराई है, महंगाई इतनी बढ़ी , खुद महंगाई शरमाई है।  तेल भराने गए कार में, सोच रहे हैं खड़े-खड़े, यह कार की तेल भराई है या जेब की शामत आई है।  महंगाई से लड़ने में ताकत तो खूब लगाई है, बेकारी का हमला ऐसा, थोड़ी बहुत कमाई है।  रोटी का निवाला मुंह तक आते आते ठहर गया, भूखे पेट ख्याल आया, क्या बच्चों ने रोटी खाई है।  जमीन से ज़मीर तक सब कुछ तो बिकता है यहां, वाह रे कलयुग, आत्मा बिकने की नौबत आई है।  कोशिश है गरीबों को गरीबी रास आने लगे, असल तो महंगाई ही इस दौर की सच्च...

दूध के फायदे | कौन-सा दूध आपके बच्चे के लिए सबसे सही है

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दूध हजारों वर्षों से मानव आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा हैं और इसकी वजह है इसमें मौजूद पोषक तत्व और उनसे शरीर को होने वाले फायदे । इसमें कैल्शियम, प्रोटीन, पोटैशियम और फास्फोरस जैसे जरूरी न्यट्रिएंट्स होते हैं। दूध हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूती देता है। दूध हमारे शरीर के अंदर बहुत से पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है। हड्डियों से लेकर दांतों तक और शरीर के विकास में एक अहम रोल अदा करता है। कौन सा दूध आपके बच्चे के लिए सबसे सही है ? आमतौर पर भारत में लोग दो तरह के दूध का इस्तेमाल करते है। पहला लोकल डेयरी के जरिए मिलने वाला कच्चा दूध। यह डेयरी सीधा पशुओं का दूध घरों तक पहुँचाते हैं।  दूसरा होता है पैकेट वाला दूध जो आसानी से आस पास की दुकानों से मिल जाता है। यह तीन प्रकार का होता है। टोंड, डबल टोंड और फुल क्रीम दूध। आपके लिए यह जानना जरूरी है कि कौन-सा दूध आपके लिए सबसे सही है। कच्चे दूध के शुद्ध होने पर बल्कि इसकी गुणवत्ता पर भरोसा करना थोड़ा मुश्किल है। कच्चे दूध का उत्पादन आमतौर पर ग्रामीण इलाकों से शहरी क्षेत्रों तक किया जाता है। इस दौरान कुछ बातें हैं जो इसे सवालों के घ...

सार्थक शर्मा और दीया मलिक ने चैंपियनशिप सीरीज टूर्नामेंट में एकल खिताब पर जमाया कब्जा

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  नई दिल्ली :  सार्थक शर्मा और  दीया मलिक ने शुक्रवार को  बैद्यनाथ प्रसाद टेनिस अकादमी, नई दिल्ली में संपन्न हुए AITA CS7 अंडर-18 टेनिस टूर्नामेंट में लड़कों और लड़कियों के एकल खिताब  जीते। लड़कों के फाइनल में सार्थक शर्मा ने आयुष को मात दी। हालांकि, लड़कियों के फाइनल में, दीया मलिक ने अनीशा शिव कुमार को 6-2,6-2 से हरा कर चैंपियनशिप सीरीज टूर्नामेंट में एकल खिताब पर कब्जा जमा लिया। शिवम देवम और सचिन राणा 6-2, 6-3 से इजहान अशफाक और प्रथमेश राज सिंह  को हरा कर चैंपियनशिप सीरीज टूर्नामेंट में डबल्स के विजेता बने। लड़कियों के डबल्स टूर्नामेंट में प्रिशा प्रसाद और साक्षी चौधरी  6-4,6-3 से अनीशा शिव कुमार और प्रणीत कौर को हरा कर विजेता बनी ।

Navchetna magazine | April 2022 | travel special | cover page

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  cover page April 2022 संपादक की कलम से : मैं श्रीमती चेतना मालिक ,नवचेतना टीम की ओर  से सभी पाठकों का अभिनन्दन करती हूँ। नवचेतना एक डिजिटल हिंदी मैगज़ीन है जिसका उद्देशय इक्कीसवीं सदी की आधुनिक नारी को और अधिक सजग , सुयोग्य व स्वालंभी बनाना है।  यह हर गृहणी व कामकाजी महिला के मन का आईना है। इस मैगज़ीन में  विभिन्न विषयों जैसे कुकिंग , हेल्थ , लाइफस्टाइल , एजुकेशन, रोजगार आदि पर  सरल भाषा में जानकारी देने की कोशिश की गयी है।  इसके साथ साथ कहानियों ,कविताओं व गेम्स के द्वारा  पाठकों के मनोरंजन का ख्याल भी रखा गया है। इस महीने की यात्रा - विशेषांक में पाठकों को अकेले यात्रा  के दौरान धयान रखने वाली कुछ जरूरी बातें बताई गयी है । कुछ ऐसे गेम्स बातये गए है जो सफ़र  के दौरान खेलें जा सकते है। घर से दूर घर का खाना बनाने के लिए कुछ ख़ास रेसिपी भी इस अंक में दी गयी है।   इसके साथ साथ  कहानी व कविता का आनंद  पाठक उठा सकते है।   इस वर्ष  02 अप्रैल से शुरू होकर 11 अप्रैल तक चैत्र नवरात्रि रहेगी। नव...

ना मिलने से | काव्य के रंग डा. विकास बुधवार के संग

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 यहां डा. विकास बुधवार द्वारा लिखी कविता प्रस्तुत की जा रही है।  कोई ना बच पाया , कोई कमी ना मिलने से।  कहीं पर आसमान तो,  कहीं जमीन न मिलने से।  आती-जाती सांस बन कर,  रह गए कुछ लोग।  वे तो जी ही नहीं पाए,  जिंदगी ना मिलने से।  अंगूठा चूसता बच्चा देखकर , सोचती है मां।  यह कैसे जिंदा बच पाएगा ,  रोटी ना मिलने से।  कब तक बची रहती,  आखिर लुट ही गई इज्जत।  कलाई को राखी,  सर को ओढनी ना मिलने से।  लड़कियों को कोख में , फना करते हुए सोचा।  कितने लड़के कुंवारे हैं,  एक लड़की ना मिलने से।  वादे तो सुने होंगे ,  सियासत के हवाले से।  लगी पर हाथ मायूसी ,  नौकरी ना मिलने से।  अंधेरों के हवाले जिंदगी ,  करता नहीं कोई।  बहुत मायूस है कुछ लोग ,  रौशनी ना मिलने से।  ये भी पढ़े : बोलना चाहती हूं मैं | Hindi poem on women CLICK HERE होली के रंग CLICK HERE काफ़िला साथ ,सफर तन्हा  CLICK HERE

देखा है | काव्य के रंग डा. विकास बुधवार के संग

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  यहां डा. विकास बुधवार द्वारा लिखी कविता प्रस्तुत की जा रही है।  जिन आंखों ने आती-जाती,  हरियाली को देखा है।  उन आंखों ने अब के कैसी ,  बदहाली को देखा है।  एक दिहाड़ी के पैसों में , बिकते देखी एक इज्जत।  भूखे पेट के आगे एक,  खाली थाली को देखा है।  खून और पानी का अंतर , अब के कोई बताए तो।  खून के आंसू रोती,  आंखों की लाली को देखा है।  जिन बाजारों ने अक्सर तो,  रौनक मेले देखे थे।  उन बाजारों में पसरी , उस कंगाली को देखा है।  आंसू की उन बूंदों से तो,  सातों सागर हारे हैं।  पत्ते पत्ते पर रोती , डाली डाली को देखा है।  कहां देख पाएगा वह,  यह खूनी होली का मंजर।  जिसने हरदम जगमग जगमग , दिवाली को देखा है।  ये भी पढ़े : बोलना चाहती हूं मैं | Hindi poem on women CLICK HERE होली के रंग CLICK HERE काफ़िला साथ ,सफर तन्हा  CLICK HERE