खतरे की घंटी है फास्ट फैशन | सस्टेनेबल फैशन ही है एकलौता विकल्प | कपडे रीसायकल कीजिये
फास्ट फैशन :
सरल भाषा में कहें तो फास्ट फैशन एक ऐसा नया ट्रेंड है जो लेटेस्ट डिजाइन को लोगों तक जल्दी और कम दामों में पहुंचाता है। यह स्टाइलिश दिखने का एक सस्ता विकल्प है। जो लोग महंगे कपड़े नहीं खरीद सकते ,पर ट्रेंड में रहना चाहते है , ये उनके लिए वरदान है। कपड़े की क्वॉलिटी कम रहने के कारण उसके दाम भी कम होते हैं। नया सीजन आते ही बाज़ार नई सेल और नई कलेक्शन से भर जाता है। सेल के लालच में हम बिना जरूरत के खरीददारी शुरू कर देते है। लोग अब शादी-ब्याह या त्यौहार पर ही नहीं बल्कि हर मौसम में, हर मौके पर नए कपड़े खरीदना पसंद करते हैं।
लोगों का ज्यादा ध्यान सस्ते दामों में बिकने वाले कपड़ों पर है जिसे वे थोड़े समय इस्तेमाल कर फ़ेंक सकते है। इससे काफी कपड़ा बर्बाद होता है । हर 10 में से 6 कपड़े एक साल के अंदर कूड़े के ढेर में चले जाते हैं। फास्ट फैशन फॉलो करने के चक्कर में हमने जो कपड़ों के कूड़े का ढेर तैयार किया है वो कभी खत्म ना होने की श्रृख्ंला में शामिल हो चुका है। रोजाना बदलने वाला फैशन वातावरण को प्रदूषित करने के साथ हमारे प्राकृतिक संसाधनों को भी नष्ट कर रहा है। फास्ट फैशन ने बहुत ही फास्ट तरीके से हमारे प्राकृतिक जल स्त्रोतों, हवा और जमीं को खराब करना शुरू कर दिया है।
इकोवॉच जोकि यूएस की एक न्यूज साइट है और पर्यावरण संबंधी मुद्दों के बारे में लोगों को जागरुक कर रही है , ने तेल इंडस्ट्री के बाद गारमेंट इंडस्ट्री को प्रकृति के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक बताया है।
फैशन की ये दीवानगी आपकी जेब से ज्यादा पर्यावरण पर भारी पड़ रही है। आइये जानते है कि जो कपड़े हमें खूबसूरत दिखाते हैं, वो असल में कैसे धरती को गंदा कर रहे हैं :
१. लोग सबसे ज्यादा सूती कपडे पहनना पसंद करते हैं, जिसके लिए जरूरी है कपास। कपास की खेती दूसरे किसी भी फसल के मुक़ाबले धरती की उर्वरक क्षमता को कम करती है। इसके लिए तुलनात्मक रूप से ज्यादा पानी की जरूरत है कपास की खेती के लिए खाद, कीटनाशक और दूसरे हानिकारक रसायनों की भी बहुत ज़्यादा ज़रूरत होती है।
२. कपड़ा बनने की विधि में हजारों तरह के रसायनों का इस्तेमाल होता है और जो वेस्ट पैदा होता है वो वातावरण को दूषित करता है।
३. कारखानों से निकलता धुंआ हवा को जहरीला बना रहा है। फैशन कारोबार से कार्बन डायऑक्साइड गैस के उत्सर्जन में 60 फीसदी की रफ्तार से बढ़ोतरी हो रही है। जो 2030 तक 2.8 अरब टन प्रति वर्ष तक पहुंच जाएगी।
४. पॉलिएस्टर और नाइलॉन तैयार करने के लिए कोयला इस्तेमाल होता है जिसे पाने के लिए धरती खोदी जा रही है और जंगल काटे जा रहे हैं।
५. सिंथेटिक फाइबर जैसे पोलीस्टर, नाइलॉन, एक्रिलिक को जब मशीन में धोया जाता है तब उनके रेशों से लाखों सूक्ष्म कण अलग हो जाते हैं। ये कण नालियों से होते हुए नदी, तालाब और फिर समंदर में जाकर मिलते है। दुनिया भर में प्रदूषित जल का 20 फीसदी हिस्सा सिर्फ इसी वजह से है।
दुनिया के बड़े देश इस बात से वाकिफ है कि जो धंधा मुनाफे का दिखाई दे रहा है वो असल में मुनाफे के पीछे देश की बर्बादी लाया है। इसलिए यह देश भारत, बांग्लादेश, वियतनाम और पाकिस्तान जैसे विकासशील देशों में गारमेंट उद्योगों लगा रहे हैं। बड़ी -बड़ी विदेशी कंपनियां हमारे देश में अपना माल बनवाती हैं। यहां पानी, बिजली, प्राकृतिक संसाधन सब मौजूद हैं और कम कीमत में मजदूर भी मिल जाते हैं। अगर प्रदूषण होता है तो हमारे देश में होता है और कचरा डंप करना हो तो भी हमारे देश की जमीं ही काम आती है। कंपनियां तो केवल गंदगी फैलाती हैं, मुनाफा कमाती हैं और हमें इसी गंदगी में ऐसे ही छोड़ जाती हैं।
सस्टेनेबल फैशन ही है एकलौता विकल्प :
इस धरती को बचाने के लिए अपनी जीवनशैली में बदलाव लाना बहुत जरूरी है। समय की जरूरत को समझते हुए खुद को फ़ास्ट फैशन से सस्टेनेबल फैशन की ओर मोड़ लें।
१. ऐसे कपड़ो का चुनाव करें जिन्हे बनाने के लिए कम कीटनाशक, केमिकल और पानी का इस्तेमाल होता हो। ये कपड़ा न केवल आपकी त्वचा के लिए अच्छा रहता है, बल्कि वातावरण को भी कम नुकसान पहुंचाता है।
२. हथकरद्या और हैंडलूम को प्रोत्साहन दें । प्राकृतिक रंगों और प्राकृतिक धागों से तैयार होने वाले कपड़े अपनाएं।
३. इनकी कीमत ज्यादा हो सकती है। इसलिए क्वांटिटी से ज्यादा क्वालिटी पर ध्यान दें।
४. गिनती के कपड़ो में ही निवेश करें। कपड़ों का भरपूर धयान रखें और उन्हें अगली पीढ़ी को याद के रूप में सौंप कर जाएँ।
५. अलमारी में कपड़ों के ढेर को त्यागना जरूरी है। जिन कपड़ो से आपका मन भर गया है उन्हें किसी जरूरतमंद को दे दें। जिसे आप कचरा समझ रहे है , वो किसी लिए खजाना हो सकता है।
६. हम सब के पास कुछ ऐसे कपडे होते है , जो 2 या 3 बार ही पहने जाते है। जैसे शादी के महंगे जोड़े। इनमे निवेश करने की बजाय इन्हे रेंट पर लेने की कोशिश करें। आजकल तो शादी के जोड़ो को पीढ़ी दर पीढ़ी पहनने का ट्रेंड है। नए लहंगे की बजाय , मम्मी की असली बनारसी साड़ी दुल्हन की ख़ूबसूरती में चार चाँद लगा सकती है।
७. जो कपडे किसी को देना नहीं चाहते , उन्हें रीसायकल कीजिये।

क्या आप जानते है कि सिर्फ़ एक सूती टी-शर्ट बनाने के लिए लगभग 2,700 लीटर पानी की ज़रूरत होती है ?
क्या आपको पुरानी टी शर्ट से पोंछा / डस्टर बनाने में शर्म आती है ?
क्या आप नया पोंछा/डस्टर लेने के लिए बाज़ार भागते है ?
इस बार बाजार जाने से पहले ये सोच लीजिए कि कहीं फैशन के पीछे की ये भागमभाग आपको प्रकृति का दुश्मन तो नहीं बना रही?




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