" चीकू , जल्दी उठो ! 7:00 बज रहे हैं , स्कूल के लिए लेट हो जाओगे , स्कूल बस भी निकल जाएगी " हेमा चिल्लाई । जबरदस्ती आंखों को खोलने की कोशिश करते हुए चीकू ने कहा " आपने आज फिर मुझे लेट उठाया है ।" " ज्यादा मत बोलो ! चुपचाप तैयार हो जाओ । आज अलार्म नहीं बजा । " बोलते हुए हेमा कमरे से बाहर निकल गई । आज फिर हर रोज की तरह हेमा अलार्म बंद करके दोबारा सो गई थी । 7:00 बजे आंख खुली। 7:30 चीकू की स्कूल बस आती है और 8:00 बजे उसे भी ऑफिस के लिए तैयार होकर निकलना है । बेडरूम में घुसी तो देखा कि राहुल अभी तक बिस्तर पर ही सुबह की चाय का इंतजार कर रहा था। " अरे ! एक दिन क्या आप अपने लिए चाय खुद नहीं बना सकते ? लेट हो जाएंगे तो मुझे ही दोष देंगे । " " हेमा , तुम्हारा तो यह रोज का काम हो गया है । तुम रोज लेट क्यों उठती हो ? " राहुल ने गुस्से से कहा । " मैं भी इंसान हूं , मुझे भी आराम का हक है । डिनर करते- करते ग्यारह बज जाते है । अगर मैं रात को लेट सोऊंगी तो , सुबह जल्दी कैसे उठ पाऊंगी ? " " इस घर में तो एक कप चाय भी सुकून की नहीं मि...
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