Exam stress | परीक्षा के तनाव से कैसे निपटें?
पढाई में आपके बच्चे की चाहे कितनी भी दिलचस्पी क्यों न हो , परन्तु परीक्षा के वक्त अधिकांश छात्र तनाव की स्थिति में आ ही जाते है। इस तनाव को exam stress कहा जाता हैं।
इस साल रंगों का पर्व होली भी बोर्ड की परीक्षाओं के दौरान पड़ रहा है। जाहिर है ऐसे में स्टूडेंट्स खुद को होली के रंगों में सराबोर होने से चाहकर भी रोक नहीं पाएंगे। इससे परीक्षा की तैयारी में कमी हो सकती है। तैयारी में कमी स्ट्रेस का सबसे अहम् कारण होती है। परीक्षा का थोड़ा बहुत तनाव तो बच्चे को पढने के लिए प्रेरित करता है , लेकिन इस तनाव की अधिकता उसके लिए नुकसानदायक हो सकती है।
आइये जाने की वे कौन-से अन्य कारण है जिनसे एग्जाम स्ट्रेस पैदा होता है।
(1 ) माँ-बाप की बच्चो से उम्मीद:
परीक्षा का समय आते ही न सिर्फ बच्चो को बल्कि उनके माँ-बाप को भी टेंशन शुरू हो जाती है। वो सोचते है कि उनके बच्चे , आस-पड़ोस के या उनके रिश्तेदारों के बच्चो से ज्यादा नंबर लेकर आये । इसके लिए वह अपने बच्चो की तुलना दुसरे बच्चो से करने लगते है, खासकर ऐसा दसवीं और बाहरवी की परीक्षा में देखा जा सकता है। हालाकि यह एक हद तक, उदहारण देने या अपने बच्चो को उत्साहित करने के लिए सही है । लेकिन बार बार अपने बच्चो की तुलना दुसरो से करना उन पर दबाव बनाने जैसा है।
(2 ) छात्रों की आशाएं :
ऐसा जरूरी नही है की दबाव सिर्फ दुसरो से ही आता है । कई बार दुसरो से खुद की तुलना करने से भी बच्चे स्ट्रैस में आ जाते है। दूसरों ने तो होली भी नहीं खेली ,उन्होंने तो खूब पढ़ाई की होगी ,यह सब बातें सोच कर भी बच्चे में तनाव पैदा होता है। इसके अलावा, जो बाते ज्यादा तनाव पैदा करती है, वो है कि परीक्षा पत्र कितना आसान या मुश्किल आएगा। कई बार बच्चे इस टेंशन में भी पढ़ नही पाते।
(3 ) एकदम से रूटीन में बदलाव आना:
परीक्षा का समय आते ही बच्चे अपना रोजमर्रा का टाइम-टेबल बदलते है और अधिकतर समय पढाई को ही देना चाहते है। सामान्यत: बच्चे पढाई के साथ साथ खेल-कूद, गेम्स और दोस्तों के साथ घुमने का शौक रखते है। अचानक से रूटीन में आया बदलाव समस्या पैदा करता है जो की चिंता और चिड़चिड़ेपन को जन्म देता है।
चिंता की वजह से धयान व् एकाग्रता में कमी आती है। बच्चे का आत्मविश्वास डगमगाने लगता है। नींद में कमी हो जाती है जो , चिड़चिड़ाहट को जन्म देती है। ऐसे में बच्चा कम बोलता है और उसे भूख भी काम लगती है।
यह सभी तनाव के संकेत होते है जिन्हे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
परीक्षा के इस तनाव को दूर करने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखे :
(1) सही समय प्रबंधन करे :
बच्चे को अपनी परीक्षा के शेड्यूल के अनुसार अपने पढाई का टाइम टेबल बनाना होगा।धयान रखें की वो दिनचर्या का हर हाल में पालन करे। इससे एग्जाम की तैयारी में सहूलियत होती है। परिणामस्वरूप उसे तनाव भी नहीं होगा।
(2) पढाई के लिए बेहतर माहौल बनाये :
स्टूडेंट अगर खुद होली न भी खेलें, मगर घर के अन्य सदस्य तो खेलेंगे ही। आस-पड़ोस में भी होली के त्यौहार पर खूब धमाल मचेगा , ऐसे में पढ़ाई करना बहुत मुश्किल हो जाएगा।परीक्षा के दिनों में बच्चे का पढाई के लिए ऐसा माहौल होना चाहिए, जहाँ उसे किसी भी प्रकार की बाधा न आये।वे किसी अलग कमरे में पढाई कर सकते है जहाँ कोई और न हो। उसे टेलीविज़न की आवाज तथा अन्य किसी भी प्रकार के शोर – शराबे से दूर रखें जिससे आपका बच्चा अपनी पढ़ाई में धयान लगा सके।
(3) बच्चा आशावादी सोच अपनाये:
आप भी सकारात्मक सोच रखे।आशावादी सोच हमारे अन्दर एक नयी स्फूर्ति पैदा करती है। इसलिए एग्जाम से पहले अच्छे रिजल्ट के बारे में इमेजिन करे और उसे एन्जॉय करे।
(4) पढाई के बीच ब्रेक है जरुरी :
लम्बे समय तक स्टडी में लगे रहना थकान उत्पन्न करता है । इसलिए गहन अध्ययन के दौरान बीच – बीच में ब्रेक जरुर लेने के लिए बच्चे को समझाएं। हर 30 से 35 मिनट पर कुछ देर का ब्रेक लेने से तनाव कम होता है और तरोताज़ा दिमाग़ से की गई पढ़ाई अधिक लाभ पहुंचती है । स्टूडेंट्स को थोड़ा रिलेक्स रहना चाहिए। इस दौरान मूड बदलने के लिए होली खेल सकते हैं। ब्रेक के दौरान बच्चे अपने दोस्तों से बाते कर सकते है, गाना सुन सकते है, थोड़ा टहल सकते है और कुछ हल्का – फुल्का खा- पी सकते है।
(5) दवा से करे परहेज :
एग्जाम के दिनों में टेंशन का होना आम बात है । यह हर उस छात्र को होता है जो अपनी पढाई और परीक्षाओ के प्रति गंभीर होता है । इसलिए इस चिंता को दूर करने के लिए किसी ड्रग या दवा के सेवन से अपने बच्चे को बचाए। कई स्टूडेंट्स जो परीक्षा के तनाव को नहीं झेल पाते, वे इस तनाव को कम करने के लिए सिगरेट, शराब, किसी दवा व अन्य नशीली चीजो का सेवन करते है , जो उनके मानसिक और शारारिक स्वास्थय के लिए बहुत ही हानिकारक होता है।
(6) संतुलित आहार बहुत जरुरी है :
स्टडी के दौरान अपने खान – पान को भूल जाना अक्सर बच्चों की आदत होती है। इसका पढाई पर विपरीत असर होता है। जब सेहत ही सही नहीं होगी, तो भला पढाई कैसे अच्छी तरह से हो सकेगी ? इसलिए अपने बच्चे को संतुलित भोजन खिलायें। इस दौरान जंक फ़ूड की अधिकता से बचे। बच्चे को ऐसे आहार न दे , जो जरुरत से ज्यादा तैलीय और वसायुक्त हो। एक बात और, बच्चा नियमित अन्तराल पर खाना जरुर खाएं। पढाई के कारण खाना कतई न भूले।
(7) एक्सरसाइज के लिए समय निकाले :
परीक्षाओ के दिनों में तनाव से निकलने का सबसे आसान तरीका है नियमित रूप से व्यायाम करना। व्यायाम आपके बच्चे को मानसिक रूप से व शारारिक रूप से फिट रखेगा. बीच – बीच में रिलैक्स्ड होकर गहरी साँस लेना फायदेमंद होता है।
(8) पर्याप्त नींद तनाव को दूर करती है :
नींद का मनुष्य के स्वस्थ रहने से गहरा नाता है। धयान रखें कि आपका बच्चा कम से कम 7-8 घंटे की नींद जरुर ले।
उम्मीद है यह टिप्स आपके बच्चे को परीक्षा के तनाव से दूर रखने में आपकी सहायता करेंगे। तो इस साल भी बिना किसी तनाव के आप सभी, रंगो के त्यौहार होली का आनंद जरूर लीजिये।
आप सभी को होली की बहुत बहुत शुभकामनायें !

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