nukkad natak on panch tatva aur nari



NUKKAD NATAK ( FIVE ELEMENTS AUR NARI )

सभी (तालियों के  साथ  ) -

आग  ,हवा  ,पानी ,
धरती  और आकाश |
नारी  के हर रुप में होता,
 है  इनका  आभास |

आग  ,हवा  ,पानी ,
धरती  और आकाश |
नारी  के हर रुप में होता,
 है  इनका  आभास |

1:स्वागत है आपका माँ सरस्वती के  देश  में  ,जहा  बेटी  को  किताबों  से  दूर  रखा   जाता  है।

2 :स्वागतहै आपका माँ लक्ष्मी  के  देश  में  , जहा लक्ष्मी  के  चेहरे  पर  तेजाब  फेंका  जाता  है।

3 :स्वागतहै आपका माँ सीता   के  देश  में  , जहा सीता   को  हर रोज  अग्निपरिक्षा  देनी  पडती  है |

4 :स्वागतहै आपका माँ काली    के  देश  में  , जहा काली    को  उसकी शक्ति से नही  रंग  से  पेहचाना  जाता    है |

5:स्वागत है आपका माता  सती    के  देश  में  , जहा  उसे  अपने  पती  के  हाथों  सती होना पड़ता है।

one lady:
पर  मैं  नारी  ,
कभी  ना हारी |
मिटा सका  न  कोई  ,
हस्ती हमारी.

           first pair of ladies (GENDER INEQUALITY)

पहली : एक ही  घर  में  पैदा हुए ,
पर लड़के का ज्यादा  भाव  है |
जब मैं आगे पढना चाहती  हूँ ,
मुझे  दिखाते  ताव  हैं |

दुसरी : इन  बातों  को भूल  कर  तू ,
अपनी खुशियों  के संग  हो जा |
रोक सके  न  ज़िसे  कोई  ,
उस  हवा  सा  सफेद  रंग हो  जा |

सभी  (तालियों के  साथ  )-

आग  ,हवा  ,पानी ,
धरती  और आकाश |
नारी  के हर रुप में होता,
 है  इनका  आभास |

आग  ,हवा  ,पानी ,
धरती  और आकाश |
नारी  के हर रुप में होता,
 है  इनका  आभास |

second pair of ladies (SEXUAL HARASSMENT)

पहली: गुंडे  सारे  घुमे  free,
पर सजा मेरी  skirt पाती  है |
हर  गुनाह  के बाद  सलाह  ,
मुझे  ही क्यूँ आती  है ?

दुसरी : छू  सके  ना कोई  तुझे  ,
तू  जोर  का  करंट हो जा |
तू  पवित्र  गहरे पानी  सी  ,
हल्का  नीला  रंग  हो  जा  |

सभी   (तालियों के  साथ  ) -

आग  ,हवा  ,पानी ,
धरती  और आकाश |
नारी  के हर रुप में होता,
 है  इनका  आभास |

आग  ,हवा  ,पानी ,
धरती  और आकाश |
नारी  के हर रुप में होता,
 है  इनका  आभास |

third pair of ladies (SOCIETY BEING JUDGEMENTAL)

पहली: लड़की  पढी लिखी  है भैया ,
रोटी  कहाँ  पकाएगी ?
इतना ज्यादा  कमाती  है  ,
पती  को  नौकर  बनाएगी |

दुसरी: वे  खींचे  तुझको  नीचे  ,
तू  और ऊँची  पतंग  हो  जा  |
तू  खुले  आसमान  सी  ,
गहरा नीला  रंग  हो  जा  |

सभी (तालियों के  साथ  )-

आग  ,हवा  ,पानी ,
धरती  और आकाश |
नारी  के हर रुप में होता,
 है  इनका  आभास |

आग  ,हवा  ,पानी ,
धरती  और आकाश |
नारी  के हर रुप में होता,
 है  इनका  आभास |

FOURTH PAIR OF LADIES ( BODY SHAMING)

पहली: अरे ! थोडी  पतली  होती  ,
तो  सुन्दर  लगती  |
हाँ  ! थोड़ी  गोरी  होती  तो ,
  ये  साडी इस  पर  कितनी  सजती ?

दुसरी : ऐसी  बेढंगी बाते  मत  सुन ,
तू  बिन्दास बेढंग हो जा |
तू  जीवनदाता सहनशील ,
धरती का हरा  रंग हो  जा  |

सभी (तालियों के  साथ  ) -

आग  ,हवा  ,पानी ,
धरती  और आकाश |
नारी  के हर रुप में होता,
 है  इनका  आभास |

आग  ,हवा  ,पानी ,
धरती  और आकाश |
नारी  के हर रुप में होता,
 है  इनका  आभास |

FIFTH PAIR OF LADIES ( DOMESTIC VIOLENCE)

पहली : होगी  तू  घर  की  लक्ष्मी  ,
पर घर  का मुखिया  मैं  रहूँगा |
प्यार  - प्रेम  सब एक  तरफ  ,
होगा वही  जो मैं  कहूँगा |

दुसरी : ऐसी  नकली  मर्दांगी से लड़ने ,
तू  रोज  एक नई  जंग  हो  जा  |
हर  मुशकिल  को  पिघलाने  वाली ,
आग  का  लाल  रंग  हो  जा |

सभी (तालियों के  साथ  )-

आग  ,हवा  ,पानी ,
धरती  और आकाश |
नारी  के हर रुप में होता,
 है  इनका  आभास |

आग  ,हवा  ,पानी ,
धरती  और आकाश |
नारी  के हर रुप में होता,
 है  इनका  आभास |

 EVERYONE:

 पंच तत्व से बने हुए हम,
ना रुके ना झुके कभी।
दृड निश्चय हो मन के अंदर,
पा लेंगे मंजिल सभी।

THANK YOU

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