पंच तत्व और नारी hindi poem on panch tatva aur nari




       पंच-तत्व और  नारी 

नारी  तू  है ,
एक  अदभुत माया |
ज़िसे प्रकृति  ने  ,
पंच-तत्वो से  बनाया |

हवा  ,पानी  ,अग्नि,
धरती और  आकाश |
नारी  के  व्यक्तित्व में  होता ,
है  इनका  अभास |

तेरा  प्रेम है  पानी  सा  ,
निश्छल और  गहरा |
तेरी  सोच मानो बहती पवन ,
जिस  पर  डाल  न  सके  कोई  पहरा |

ममत्व ,समर्पण ,सहनशीलता
व  त्याग  का  अहसास |
हे  नारी  ! तुझमे बसता  है ,
ये पृथ्वी-तत्व खास |

सूर्य  के  समान  तेज  है  तेरा  ,
तू  ही  तो  जीवनदाता है |
हर  मुश्किल को  पिघलाने वाला ,
अग्नि-तत्व तुझमें साफ  नजर  आता है |

कभी  इतराकर ,
कभी  इठलाकर,
जब  आसमान में तू  उडती है |
तब  अपने,
मूल- तत्व आकाश  से ,
जा जुडती है |

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