Hindi Poem on Gandhi ji

   

     प्यारे बापू

2 अक्टूबर 1869 में,
 चमका एक सितारा|
बापू के  नाम  से  जानता  है ,
 जिनको  ये  भारत  सारा |

माता उनकी थी धार्मिक  माहिला  ,
और पिता रियासत  के दिवान |
भेजा गया  उन्हे इंगलेंड ,
बनाने खुद की  पेहचान |

पूना में कुछ दिन  की वकालत ,
फिर चले गये दक्शिण अफरिका|
वहां भारतियों  के  साथ  ,
अंग्रेजो का व्यवहार था  फीका |

अपनो के हक़ के लिए ,
शुरू  कर दिया सत्याग्रह |
डोर संभाली आंदोलन की ,
और गए फिर काराग्रह  |

आजादी के  लिए कई ,
यातनाएं  भी झेली जेल में |
पर  अंग्रेज टिक ना पाये  ,
सत्य - अहिंसा  के खेल में |

देश को आजाद कराया ,
अपने माजबूत इरादो से |
प्यारे बापू  अमर रहेंगे ,
सदा हमारी य़ादो में  |

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